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  • ek safar zindagi ka by: raveendra singh 119.00

    इस उपन्यास मे बिल्कु ल ही सरल भाषा का प्रयोग बकया गया है। बजससे ये आसानी से अबधक – से अबधक लोगोों से जुड़ सके । मैने इस उपन्यास में वही बलखा है। जो सच है और जो होता है बक कै से एक लड़का अपने जीवन मे पढाई की शुरुआत करता है और बिर वह बकन- बकन हालातोों से गुजरते हुए अपनी लक्ष्य की ओर अग्रसर होता है। इस उपन्यास मे मेरे द्वारा लिखीं गयी सारी बातें मैने अपने अनुभव सेप्राप्त की है। मैने इसमे बदखाया है बक एक बवद्याथी चाहे वो लड़का हो या लड़की उसे अपने लक्ष्य को पाने मे बकतनी तबपश झेलनी पड़ती है। जीवन के उलझे हुए पहलुओों से खुद को कैसे बचा कर रखना पड़ता है। इस उपन्यास मे मैने ये भी बदखाया है बक एक लड़की जब बहार रहकर तैयारी करना चाहती है, और अपने सपनो को पूरा करना चाहती है तो उसे बकन- बकन कबिनाइयोों का सामना करना पड़ता है। और एक लड़का जब तैयारी के दौरान भटक जाता है और यू-ट्यूि , व्हाटशाप , फेसबुक की दुबनया में खो जाता है। उसे शायद पता नहीों होता है। बक वह क्या करने चला था। और वह बकस ओर मुड़ गया है। ऐसे हालातोों में वो बिमोबटवेट भी होता है। बिर वह कै से सोंभलता है और बिर बकस तरीके से अपने सपनो की ओर आगे बढ़ता है। हााँ एक बात और कहूंगा ये मेरी पहली उपन्यास है। और शायद मैं उपन्यास की कसौटी पर खरा न उतरूं तो इसके मलये मैं सभी पाठकोूं से मााँफी चाहूंगा। ये उपन्यास मेरा अनुभव है। न मक एक कल्पना।

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