Astrology (2)

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    ग्रह शक्ति ज्योतिष संस्थान (पं०) के संस्थापक अध्यक्ष पं० वीरेंद्र शर्मा – बाबाजी (राज ज्योतिषी) का ज्योतिष जगत में आज एक स्थापित नाम है। लगभग 32 वर्ष पूर्व ज्योतिष के क्षेत्र में आपका पदार्पण महज़ एक संयोग ही था और आज उसी संयोग के फलस्वरुप समाज के समक्ष एक विशिष्ट श्रेणी के ज्योतिषकर्मी के रूप में विद्यमान हैं, क्योंकि मानवता के प्रति आप एक ज्योतिषकर्मी होने के साथ-साथ सामाजिक हितचिंतक भी हैं।

    आप नवीन एवं स्पष्टवादी विचारधाराओं के ज्योतिषकर्मी हैं, इसलिए समाज में प्रचलित ज्योतिष संबंधी रुढ़िवादी विचारधाराओं के निराकरण हेतु सदैव उद्यत रहते हैं। ज्योतिष के प्रति भ्रमित सामाजिक विचारधाराओं को भी आप नया दृष्टिकोण देने हेतु प्रयासरत हैं एवं अन्य प्रतिष्ठित ज्योतिषकर्मियों का भी आह्वान करते हैं कि वे भी अपने सद्गुणों का समाज एवं देश के हित में सदुपयोग करें, ताकि मानवता ज्योतिषी वर्ग के प्रति उदासीन न हो और समाज के निर्माण में हम अपनी भागीदारी को सुदृढ़ता प्रदान करें। सबसे अहम बात यह है कि हम सकारात्मक विचारधारा को अपनाएं और आर्थिक लाभ की सोच को गौण विषय वस्तु के रूप में देखें।

    आपने अनेकों चैनलों के माध्यम से भी मानवता को नियमित रूप से सकारात्मक दृष्टिकोण दिया और आज भी आपके आध्यात्मिक, सामाजिक और ज्योतिषीय ‘लेख’ समाज में जागरूकता लाने के लिए कई समाचार पत्रों एवं पत्र पत्रिकाओं में छपते रहते हैं – फलतः ज्योतिषी वर्ग में आपको पूर्ण सम्मान की दृष्टि से देखा जाता है। आपकी अनेक ऑडियो-वीडियो सीडी जैसे – मंत्र पुष्पांजली, नवार्ण मंत्र, देवी मंत्र, शनि मंत्र, पीपल महिमा, शनि एवं हनुमान कथा, महालक्ष्मी पूजन आदि आप की आध्यात्मिक मानसिकता का प्रमाण है।

    समय-समय पर ज्योतिष के प्रचार-प्रसार हेतु आपने कई ज्योतिष सम्मेलन भी आयोजित किए हैं और अन्य ज्योतिषीय संस्थाओं द्वारा आयोजित सम्मेलनों में भी आप अपनी उपस्थिति दर्ज कराने से नहीं चूकते जिसके परिणाम स्वरुप अनेक सम्मानों की एक बड़ी सूची आपके नाम है। आप जन कल्याण के लिए वैदिक पद्धति से उपायों को कराने में अधिक विश्वास रखते हैं।

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    Nadi Jyotish, is the most ancient and accurate process ever in the field of astrology. This is the first unique book ever to deal with the pattern of Nadiamshas which is decoded and synchronized by Prof. Abhijit Krishnan through “The Tables of Nadiamsha” as Chandrakala Nadiamsha, Suryakala Nadiamsha and Horakala Nadiamsha. Nadiamsha are the main and ultimate key factor of Nadis. Unknown facts pertaining to Nadis, Actual divisions of Nadis, Karma Theory, Cardinal features of Planets & Rashis or Bhavas, Explanations of Nakshatras, Various Ancient Dashas etc. are the additional features of this book. This book also sheds light on the author’s journey. Doesn’t matter if you are an experienced practitioner or a new learner, this book will be a handy tool to you.

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