True Accounts (3)

Showing all 3 results

Sort by:
  • Bharat Putra Damodardas Narendra Modi by: AVINASH KUMAR DIXIT 250.00

    कौन जानता था कि एक साधारण जीवन व्यतीत करने वाला व्यक्ति एक दिन प्रधानमंत्री बन जाएगा कहते हैं कि हमारी किस्मत का कोई भरोसा नहीं की हमें कहां से कहां ले जाए हमारे जीवन में क्या से क्या हो जाए हम नहीं जानते उसी प्रकार दामोदरदास नरेंद्र मोदी भी नहीं जानते थे कि वह 1 दिन पूरे भारतवर्ष के प्रधानमंत्री बनेंगे मोदी जी के जीवन में समस्त कठिनाइयां आई परंतु उन्होंने इन कठिनाई रूपी दिक्कतों से कभी हार नहीं मानी दामोदरदास नरेंद्र मोदी जी ने स्वयं कहा है व्यक्ति को कभी हार नहीं माननी चाहिए एक समय था जब भारत एकता रूपी महान शक्ति के साथ अपना जीवन व्यतीत करता था प्रस्तुत पुस्तक में दामोदरदास नरेंद्र मोदी जी ने अपने जीवन चरित्र का वर्णन किया है कि कैसे उन्होंने अपने जीवन को व्यतीत किया कैसे उन्होंने एकता रूपी महान शक्ति का चयन किया और एकता रूपी महान शक्ति के साथ व्यक्तियों को चलने का उद्देश्य बताया उसी प्रकार जिस प्रकार दामोदरदास नरेंद्र मोदी ने अपने जीवन को कठिनाइयों और परेशानियों से हार नहीं मानी इस पुस्तक का उद्देश्य एकमात्र है कि अपने जीवन में हमें नई मनुष्यता लानी है अपना मन एकाग्र करके अपनी शिक्षा को प्राप्त करना है इस पुस्तक से हमें शिक्षा मिलती है कि कि किस प्रकार व्यक्ति अपनी परेशानियों और कठिनाइयों से जीत सकता है अपने पर भरोसा कर सकता है कि वह हार नहीं मानेगा इसी प्रकार अपने जीवन पर्यंत के लिए चलता जाए का चलता जाएगा चाहे जितनी भी परेशानियां आए पीछे मुड़कर नहीं देखेगा इन परेशानियों और कठिनाइयों उदाहरण नरेंद्र दामोदरदास मोदी साक्षात हैं हमें उनके जीवन से सीखना और सिखाना है हमारे जीवन का उद्देश्य होना चाहिए एकता एकजुट कर रहना मुसीबतों में सब का साथ देना हमें इस बुक से शिक्षाएं मिलती है

  • img-book

    This book is a tribute to mostly unsung heroines of our lives; our mothers. The book is a precious and playful banter between a 70-year-old traditional Punjabi mother and her 45-year-old part-Punjabi, part-cosmopolitan, part-traditional, part-rebel daughter, trying to get along with each other while sliding down the chute of daily life.
    Based in a Punjabi household, the book has a universal appeal as the author has translated every Punjabi dialogue or expression written in ‘Gurmukhi’ script, into English. The book has a very large-hearted witty approach to life’s molehills and mountains alike.

  • img-book

    This book is a tribute to mostly unsung heroines of our lives; our mothers. The book is a precious and playful banter between a 70-year-old traditional Punjabi mother and her 45-year-old part-Punjabi, part-cosmopolitan, part-traditional, part-rebel daughter, trying to get along with each other while sliding down the chute of daily life.
    Based in a Punjabi household, the book has a universal appeal as the author has translated every Punjabi dialogue or expression written in ‘Gurmukhi’ script, into English. The book has a very large-hearted witty approach to life’s molehills and mountains alike.

Publish Book Now
close slider








Note: This question makes sure that you are not a robot.